राजस्थान, छत्तीसगढ़ में मुँह बंद, हरियाणा-मणिपुर पर मोहब्बत की दूकान खोल रहे राहुल गांधी 

नई दिल्ली: सावन के चौथे सोमवार के दिन हरियाणा के नूह में निकाली गई शोभायात्रा पर मुस्लिमों द्वारा घात लगाकर हमला कर दिया। हमले के बाद उपद्रवियों ने जमकर दंगे किये। पुलिस वालों और आम नागरिकों पर पत्थर, पेट्रोल बम से हमला कर दिया। इस दंगे में दो पुलिसकर्मियों सहित पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं इस घटना के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी मोहब्बत की दुकान खोल ली है और दंगों के लिए भाजपा, मीडिया को जिम्मेदार बता दिया है।

राहुल गांधी ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए लिखा, भाजपा, मीडिया और उनके साथ खड़ी ताक़तों ने पूरे देश में नफ़रत का केरोसिन फैला दिया है। सिर्फ़ मोहब्बत ही देश में लगी इस आग को बुझा सकती है। हालांकि, राहुल के इस बयान के बाद जनता उनसे सवाल पूछने लगी है, ये मोहब्बत की दुकान खोलने में भेदभाव क्यों हो रहा है। जहां राजनीतिक रूप से फायदा है वहीं मोहब्बत की बात हो रही। राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक मामलों पर यह दुकान खोलने की बात भी नहीं की जा रही है।

सावन के मौके पर देश भर में कांवड़ियें या शिव भक्त रैली या शोभायात्रा निकालते हैं। लेकिन इस बार देश के हर कोने में उनका विरोध या इनपर हमला करने की घटना सामने आरही है। हरियाणा हो, उत्तर प्रदेश हो, राजस्थान हो तमाम राज्यों में इस तरह की घटना सामने आई है। जिन क्षेत्रों में हमेशा से कावड़ या ये शोभा यात्रा निकाली जाती थी इस बार मुस्लिमो द्वारा निकालने नहीं दिया जारहा। इनका कहना है की मोहल्ला इनका है इसलिए हम निकालने नहीं देंगे।

इसके कारण लगातार देश में तनाव की स्थिति बनती जा रही है। खुद को सेकुलर कहने वाले और मोहब्बत की दुकान खोलने वाले राहुल गांधी इस पर मुँह सिले बैठे हुए हैं। शांति दूतो का समर्थन करने वाले ये लोग न इसपर कुछ बोलते हैं और न ही कोई मोहब्बत का पाठ पढ़ाते हैं। वहीं ऐसे बयानों और भाषणों को मौन रहकर अपना समर्थन देते हैं। बीते दिनों उज्जैन में महाकाल की सवारी को नहीं निकलने देने की बात की गई। एक तरफ हिन्दू संगठनों ने इसका जोरदार विरोध किया, लेकिन मोहब्बत की दुकान की खोलने वाले इस पर चुप्पी साधे रहे।

राजस्थान में आए दिन महिलाओं, युवाओं और नागरिकों के साथ शोषण हो रहा है। हत्या, लूटपाट, बलात्कार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एनसीआरबी के डाटा के अनुसार, राजस्थान में सालाना 6300 से ज्यादा बलात्कार के मामला दर्ज हुए। आदिवासियों, दलितों के साथ लगातार उत्पीड़न हो रहा है, लेकिन इसपर न राहुल गांधी की मोहब्बत की दूकान खुल रही और न ही प्रियंका गांधी वाड्रा की लड़की हूँ लड़ सकती हूँ वाला बयान आरहा।

यही हाल छत्त्तीसगढ़ का है। यहाँ आए दिन महिलाओं के साथ अत्याचार बढ़ता जारहा है। महिलाओं के साथ पुरुषो का भी लगातार शोषण किया जा रहा है। बीते दिनों फर्जी जाती प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी करने वालों के खिलाफ आदिवासी युवाओं ने प्रदर्शन किया। युवाओं ने नग्न होकर राजधानी की सडको पर यह प्रदर्शन किया। बीते वर्ष कवर्धा जिले में हनुमान जयंती के मौके पर झंडा लगाने को लेकर जमकर दंगे हुए, लेकिन इन घटनाओं पर राहुल कुछ बोल रहे न कोई और विपक्षी नेता बोलने को तैयार है।

इन सब घटनाओं के बाद सवाल पूछा जा रहा है कि, मोहब्बत की दुकान खोलने में इतना भेदभाव क्यों? आखिर वोट बैंक को बनाए रखने के लिए दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है। हिन्दू आस्था, उत्सवों और त्योहारों पर जिस तरह से मुस्लिमों द्वारा हमला किया जाता है। रामनवमी हो या नूर में निकाली गई शिव शोभा यात्रा उसमें जिस तरह से पेट्रोल बम और घरो के ऊपर पत्थर रखकर पूरी योजना के साथ हमला किया जाता है उसपर आखिर क्यों कोई कांग्रेस का नेता नहीं बोलता। कार्रवाई तो छोड़िये निंदा तक नहीं करता। वोट बैंक बनाये रखने के खातिर जिस तरह का दोहरामाप दंड देश की राजनीतिक दलों ने अपनाया है वह भविष्य में बहुत घातक होने वाला है।

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